खो कर फ़िराके यार में ऐसा कमाल कर

चेहरे पे जो लहू है तू उस को गुलाल कर

जानी तेरी ये सुरमई आँखों में क्या मज़ा
आँखों कि शान ये है की रो रो के लाल कर

किस्मत भी कोई चीज़ है और है भी या नहीं
आओ जवाब ढूंँड ले सिक्का उछाल कर

आँखों में खो गए तेरी बातों में खो गए
आज़ाद कर तिलिस्म से कोई सवाल कर

इतना जो खुल के आया है गैरों के सामने
मेरा नहीं तो यार तू अपना ख़याल कर

जाने लगे हैं आप तो जाएँ न शौक़ से
कितनो को हम ने रख दिया दिल से निकाल कर

मैं सच कहूँ तो यार ये पेशा अजीब है
हँसते हुए ग़ज़ल पढ़ो आँसू सँभाल कर

या रब उदास लोग तो बढ़ने लगे बहुत
अब वक़्त है के एक दो चीज़ें हलाल कर

होती है इक ग़ज़ल भी तो औलाद की तरह
औलाद की तरह ही 'रज़ा' देख भाल कर

— Adnan Raza

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