"ख़त एक उदास लड़की के नाम"

चाँद शब बह गया नदी में कल
तुम ने समझा था वो तुम्हारा है
हम नहीं कहते थे "फ़रेबी है"
तुम ने भी किस का ऐतिबार किया
वक़्त मरहम है सारे ज़ख़्मों का
तुम भी हर दर्द भूल जाओगी
रात भर जागना तो ठीक नहीं
अपनी आँखों पे कुछ तरस खाओ
हम नहीं कहते भूल जाओ, बस
याद इतना रखो कि जी पाओ
और ये लोग ये तो हैं पागल
तुम ने तो ये जहाँ बचाना है

चाँद सूरज से आगे की लड़की
क्या हुआ चाँद इक चला भी गया
कोई वो आख़िरी मंज़िल तो नहीं
ख़त्म उस पर सफ़र हुआ तो नहीं
और भी ख़्वाब देखे हैं तुम ने
कुछ तो सोचो कि उन का क्या होगा
मत सुनो, कुछ भले कहे दुनिया
इस की बातों में कुछ नहीं रक्खा
तुम को लड़नी है जंग और कई
तुम ने हर ताज जीत लाना है
और ये लोग ये तो हैं पागल
तुम हो जिस ने जहाँ बचाना है

— Ajay Pahadiya

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