'ishq ab dushwaar hota ja raha hai | 'इश्क़ अब दुश्वार होता जा रहा है

  - Aqib khan

'इश्क़ अब दुश्वार होता जा रहा है
शख़्स वो ख़ूँख़ार होता जा रहा है

चंद दाने और वो मासूम पंछी
मसअला तैयार होता जा रहा है

अक्स मेरा चीख कर ये पूछता है
ख़ुद से क्यूँँ बेज़ार होता जा रहा है

हर घड़ी ज़िंदान में बीते है अपनी
अब ये दिल दीवार होता जा रहा है

आप भी खोलो दुकाँ पैसे कमाओ
दर्द का व्यापार होता जा रहा है

हाँ वही जो तेरी गिनती में नहीं था
हाँ वही सरदार होता जा रहा है

दोस्तों के वास्ते कौड़ी न निकली
अब बड़ा दिलदार होता जा रहा है

  - Aqib khan

Sazaa Shayari

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