bahut ujlat men rehta hai vo kuchh bhi bhool jaata hai | बहुत उज्लत में रहता है वो कुछ भी भूल जाता है

  - Aqib khan

बहुत उज्लत में रहता है वो कुछ भी भूल जाता है
मोहब्बत मुझ सेे करता है मुझे ही भूल जाता है

अगर खुल जाएँ जो उसकी कभी ज़ुल्फ़ें अचानक से
अचानक से खिलाड़ी जीती बाज़ी भूल जाता है

ये लड़का सोचता है अब के तो ग़ुस्सा ही रहना है
वो थोड़ा मुस्कुराती है ये तल्ख़ी भूल जाता है

न जाने क्यूँ मेरे सब दोस्त मुझको यूँँ चिढ़ाते हैं
कि तू जब उस सेे मिलता है तो यारी भूल जाता है

वो इसको छोड़कर बाक़ी सभी कुछ याद रखती है
ये उसको छोड़कर बातें भी सारी भूल जाता है

छुपाने का है ये नाटक इसे सच मत समझना तुम
भला वो कौन है जो अपना माज़ी भूल जाता है

  - Aqib khan

Dosti Shayari

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