ऐसे हद से गुज़र गए थे हम
उस की बातों से डर गए थे हम
होश आया है अब हमें यारों
अब बताओ किधर गए थे हम
क्या हुआ फिर यहीं पे लौट आया
तेरी ख़ातिर तो मर गए थे हम
ये यहाँ भीड़भाड़ कैसी है
क्या पता कुछ तो कर गए थे हम
घर भी कामों में उलझे रहते हैं
जाने किस वक़्त घर गए थे हम
हाँ वही जिस की कोई मंज़िल नइँ
हाँ जी हाँ उस डगर गए थे हम
— Aqib khan















