जीतने पर भी मात बनती है
ऐ ख़ुदा अब नजात बनती है
बात करना बहुत ज़रूरी है
बात करने से बात बनती है
पहले महबूब बनते हैं साहब
और फिर काइनात बनती है
इश्क़ में लुट गए, हाँ ठीक हुआ
इश्क़ में वारदात बनती है
तेरी तस्वीर बन तो जाती है
पर बहुत वाहियात बनती है
वो भी लौटेगा देख लेना तुम
बा'द दिन के ही रात बनती है
— Aqib khan















