sadaa jaisi tamannaa kyun bhala meri nahin hai ab | सदा जैसी तमन्ना क्यूँँ भला मेरी नहीं है अब

  - Aqib khan

सदा जैसी तमन्ना क्यूँँ भला मेरी नहीं है अब
मुझे उसका बने रहने में दिल चस्पी नहीं है अब

जो तुम कुछ वक़्त पहले आते तो वो मिल भी सकता था
हमारे भी शहर का यार वो शहरी नहीं है अब

अगर तुम अच्छे हो तो बदले में अच्छा ही मिलता है
मुझे तो दोस्त ऐसी भी ग़लत-फ़हमी नहीं है अब

हमेशा हम से ही उम्मीद है सब झेल जाएँ हम
उसे भी कोइ समझाओ कि वो बच्ची नहीं है अब

वो बातें प्यार की कुछ दिन ही अच्छी लगती हैं सबको
मैं सुनता ही नहीं हूँ और वो करती नहीं है अब

  - Aqib khan

Bhai Shayari

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