yuñ dil se mere utar ga.e tum | यूँँ दिल से मेरे उतर गए तुम

  - Aqib khan

यूँँ दिल से मेरे उतर गए तुम
नहीं पता फिर किधर गए तुम

न ढूँढों ख़ुद को यूँँ मेरे भीतर
यक़ीन मानो कि मर गए तुम

तुम्हारा क्या है पुराना छोड़ा
नए शजर पर ठहर गए तुम

तुम्हारे जैसा मिले तुम्हें और
ख़बर हो मुझको बिखर गए तुम

वही हुनर अब सिखाओ मुझको
वो जैसे मुँह पर मुकर गए तुम

मैं कितना झूठा था कहता था जो
कि मर मिटूँगा अगर गए तुम

दिलाओ जितना मगर कभी भी
यकीं न होगा सुधर गए तुम

अदा करो शुक्रिया मेरा अब
थी मेरी सोहबत सँवर गए तुम

  - Aqib khan

Attitude Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aqib khan

As you were reading Shayari by Aqib khan

Similar Writers

our suggestion based on Aqib khan

Similar Moods

As you were reading Attitude Shayari Shayari