तुम को सुन कर के हम बुदबुदाने लगे
बेसुरा ही सही गीत गाने लगे
इक कदम की थी दूरी वहाँ की जहाँ,
आने में जाने कितने जमाने लगे?
शे'र अब भी हैं नाज़ुक ख़ुदा की क़सम
हम मुहब्बत में महफिल में जाने लगे
तुम हक़ीक़त में मेरी तो हो ना सकी
सो कहानी सा तुम को सुनाने लगे
देख बेटे को भूखा तड़पता हुआ
शा'इरी छोड़ शाइ'र कमाने लगे
— Alankrat Srivastava















