कमाल कर गया
सावन का महीना ,वो चलती सुहानी हवा।
और उस हवा में उड़ते गुलाबी दुपट्टे,
और लहराते घुंगराले भूरे बालों के बीच,
स झांँकता वो ख़ूब-सूरत रूहानी चेहरा,
और उस श्यामल देशी चेहरे पर,
बड़ी सदाकत और नज़ाकत के साथ सजे,
उन मखमली गुलाबी होंठों का,
हौले से ये कहना... अजी! सुनते हो!
कमाल कर गया
— Alankrat Srivastava















