
लहरें कितनी भी प्रबल हो हम किनारे ही रहेंगे
हम तुम्हारे थे तुम्हारे हैं तुम्हारे ही रहेंगे
गर ग़ज़ल में बात उस की हो रही है तो ये तय है
कहने वाले कोई भी हों शे'र प्यारे ही रहेंगे
— Alankrat Srivastava
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