तुम ये बोलो आँख क्यूँँ नम है परी
गोद में मेरा है सर कम है परी
हिज्र की क्यूँ बातें करते हो यहाँ
देखो कितना अच्छा मौसम है परी
कैसा मुरझाया है चेहरा ये तेरा
बोल भी अब तुझ को क्या ग़म है परी
कोई बेगम हो या शहज़ादी हो अब
तुझ से तो सब ही यहाँ कम है परी
तू अभी मत बैठ थक कर मेरी जाँ
सुन अभी तो राह दुर्गम है परी
रात सारी मेघ ये रोते रहे
लोग बोले अच्छा मौसम है परी
हाथ तू था
में पलट दूँ मैं जहाँ
छोटी सी दुनिया में क्या दम है परी
— Amit Rajvanshi 'Guru'















