वो मुझे ढूँढ़ता रहता है ये बताने को
मैं ने आग लगा दी है असियाने को
दिल को रोता हुआ छोड़ा है एक बच्चे की तरह
कोई मिलता ही नहीं इस को चुप कराने को
मैं ज़िंदगी से इस लिए भी ख़फ़ा रहने लगा हूँ
अब वजह ही कहाँ रह गई है मुस्कूराने को
अब मुझे मरने से डर नहीं लगता
मैं ने कंधा दे दिया ख़ुद के ही जनाज़े को
— Aryan Goswami















