yaar mere na tum is qadar chup raho | यार मेरे न तुम इस क़दर चुप रहो

  - Shoonya

यार मेरे न तुम इस क़दर चुप रहो
पंछी मरने लगे तुम अगर चुप रहो

बात करता था ग़ुस्से में मरने की मैं
कहती थी वो मुझे डाँट कर चुप रहो

दर्द आवाज़ में ला के क्या फ़ायदा
ख़ामुशी में दिखाओ असर चुप रहो

फिर वही होंगे झगड़े पुराने सभी
फ़ायदा कुछ नहीं लौटकर चुप रहो

आएगा अब नहीं वो पलट कर कभी
चीख़ते क्यूँ हो दीवार-ओ-दर चुप रहो

  - Shoonya

Aah Shayari

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