हम जब जब भी यार गली में आते हैं
देख के सब पागल पागल चिल्लाते हैं
एक गुलाब थमा कर मना लिया हमको
औरों को तो तोहफ़े भी भिजवाते हैं
उदास चेहरों का दुख छिपाने को हम
हँसी ख़ुशी के फिल्टर रोज़ लगाते हैं
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