छोड़ा नहीं है गुल कोई भवरों के वास्ते
चुन लाए फूल सब तेरी ज़ुल्फ़ों के वास्ते
अब शहर में बचा नहीं है रंग कोई भी
ले आए रंग सब तेरे गालों के वास्ते
शब को पड़ी ख़बर मुझे प्यारी है तीरगी
बादल ने चांदनी ढकी आँखों के वास्ते
ख़ामोशी से भरी हुई हैं गाँव की गली
शहरों में जा बसे सभी ख़्वाबों के वास्ते
चुप ही रहे सदा कभी कुछ भी नहीं कहा
जब्त आज़मातें ही रहे अपनों के वास्ते
— Avinash Joshi














