मुहब्बत में नहीं मुमकिन हमेशा ही विसाल आए
मगर कैसे जुदाई से मुहब्बत में ज़वाल आए
तिरा जो वस्ल हासिल हो तो दुनिया से मिले फ़ुर्सत
तिरे मैं हिज्र से निकलूँ तो दुनिया का ख़याल आए
अगर फ़ुर्कत मुयस्सर हो सभी को ग़म तो होता है
नहीं था इश्क़ वो सच्चा अगर दिल में मलाल आए
हमें जिस ने भुला डाला कभी दुनिया हमारी थी
तो अब क्या ग़म मनाते हम उसे दिल से निकाल आए
तिरी आँखें मुझे आवाज़ देती हैं बुलाती हैं
मगर मैं पास आया तो इन आँखों में सवाल आए
— Ayush Gupta














