bhatkte shaKHs ko raah-e-sawaab mil jaa.e | भटकते शख़्स को राह–ए–सवाब मिल जाए

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

भटकते शख़्स को राह–ए–सवाब मिल जाए
सही ग़लत का उसे गर हिसाब मिल जाए

चला ही जाऊँगा, रुकने भी कौन आया है
बस इक सवाल का मेरे जवाब मिल जाए

मैं चाहता था मुझे बस वही मिले लेकिन
वो चाहती थी कोई कामयाब मिल जाए

जो एक बार पि
यूँँ 'उम्र भर नशे में रहूँ
मिरे लबों को इक ऐसी शराब मिल जाए

बदन झुलसना मिरा इस-क़दर तो लाज़िम था
थी आरज़ू भी मिरी आफ़्ताब मिल जाए

मुझे मिली थी किसी ख़्वाब में हक़ीक़त यूँँ
किसी को जैसे हक़ीक़त में ख़्वाब मिल जाए

तू एक शख़्स की ख़ातिर फ़ना हो जाए ‘अभी’
दुआ यही है कि प्यासे को आब मिल जाए

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

Maikada Shayari

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