shaayad koi kirdaar use dhyaan bahut hai | शायद कोई किरदार उसे ध्यान बहुत है

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

शायद कोई किरदार उसे ध्यान बहुत है
सुनकर वो मिरी दास्ताँ हैरान बहुत है

जब पार किया आग का दरिया तो ये जाना
दुश्वार जो लगता है वो आसान बहुत है

महफ़िल ये शरीफों की नहीं है मुझे दरकार
मेरे लिए तो सोहबत–ए–रिंदान बहुत है

आज़ार-ए-मुहब्बत से हैं लाचार अतिब्बा
हो जाए अगर दर्द का दरमान बहुत है

इल्ज़ाम लगा कर भी मैं कुछ कर नहीं सकता
इस शहर में उस शख़्स की पहचान बहुत है

ख़ुशहाल जो रहता था मिरा यार वही अब
पढ़कर मिरी ग़ज़लें वो परेशान बहुत है

हासिल हो गुल-ए-वस्ल या फिर ख़ार-ए-बयाबाँ
जितना भी मुयस्सर है गुलिस्तान बहुत है

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

Yaad Shayari

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