हम नया एक ख़्वाब देखेंगे

फिर पुरानी किताब देखेंगे

याद ताज़ा करेंगे हम तेरी
कोई सूखा गुलाब देखेंगे

हम उन्हें देखते ही रहते हैं
क्या हमें भी जनाब देखेंगे

ख़ुद को बीमार ही करेंगे और
लोग इस
में अज़ाब देखेंगे

हाल चल ठीक-ठाक होगा पर
आदतें तो ख़राब देखेंगे

जाम से मयकशी ग़ज़ब की है
रिंद भी क्या हिसाब देखेंगे

वो ग़ज़ल को सवाल सोचेंगे
या ग़ज़ल में जवाब देखेंगे

तेरी मेहनत को कौन पूछेगा
सब यहाँ पर ख़िताब देखेंगे

आप 'भावेश' सर उठाएँ बस
आप को कामयाब देखेंगे

— Bhavesh Lohani

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