हवा तेरे मुखालिफ़ ही चली तो
उसे घर जाने की जल्दी हुई तो
किसी से मिलने की हसरत हुई है
अगर तक़दीर से भी ना बनी तो
अभी तो आसमा ये साफ़ है पर
जहाँ की धूल ऐनक पर जमी तो
ख़ुशी के साथ कैसे बैठ जाऊ
दुखों के मुँह की रौनक उड़ गई तो
लिहाज़ा मैं नहीं आता तेरे दर
तेरे दर पर अगर लाइन मिली तो
तुझे-ए-सावली लड़की ख़बर है
अगर मुझ को मोहब्बत हो गई तो
— Bhavesh Lohani














