किसी आवाज़ से प्यारे
परिंदे उड़ गए सारे
शब-ए-हिज्रा रुलाती थी
गिरा करते थे अंगारे
मुकम्मल चाँद छत पर था
चले आए सभी तारे
हमारे हाथ ख़ाली है
बहुत कुछ जीत कर हारे
तुम्हारे वास्ते हम हैं
हमारे वास्ते प्यारे?
— Bhavesh Lohani
परिंदे उड़ गए सारे
शब-ए-हिज्रा रुलाती थी
गिरा करते थे अंगारे
मुकम्मल चाँद छत पर था
चले आए सभी तारे
हमारे हाथ ख़ाली है
बहुत कुछ जीत कर हारे
तुम्हारे वास्ते हम हैं
हमारे वास्ते प्यारे?
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