मुझे अब काम इक दिन ऐसा करना है

किसी सहरा को छू कर दरिया करना है

अभी हँसते हो तुम जिन बेसहारों पर
मुझे तो उन के सर पर साया करना है

मुझे भी तोड़ना है अब किसी का दिल
मुझे ख़ुद को तुम्हारे जैसा करना है

कभी इक शब मेरी महफ़िल में आओ तुम
अगर ज़ख़्मों को फिर से ताज़ा करना है

है दिल टूटा किसी का भी अगर मुझ सा
बताता हूँ मैं कैसे अच्छा करना है

मिरा तय है यहीं जीना यहीं मरना
यहीं पर सच मुझे हर सपना करना है

न सीखा कुछ भी पहले इश्क़ से 'भोला'
तभी तो इश्क़ ये दोबारा करना है

— Swapnil Srivastava 'Bhola Lucknowi'

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