बेकार न अब अश्क-फ़िशानी कीजेवो जा चुका है ख़त्म कहानी कीजेमलबा है बदन का जो ग़ज़ल पढ़ता हैमैं मर चुका हूँ मर्सिया-ख़्वानी कीजे— Das Kanpuri