अटका हुआ हूँ मैं तो इसी इक सवाल में
क्या तुम भी खोई रहती हो मेरे ख़याल में
क्यूँ दिल की बात तुम से कभी कह नहीं सका
गुज़रेगी सारी ज़िंदगी बस इस मलाल में
हसरत ये मेरे दिल की अधूरी ही रह गई
इक गजरा था लगाना मुझे तेरे बाल में
— Daqiiq Jabaalii
क्या तुम भी खोई रहती हो मेरे ख़याल में
क्यूँ दिल की बात तुम से कभी कह नहीं सका
गुज़रेगी सारी ज़िंदगी बस इस मलाल में
हसरत ये मेरे दिल की अधूरी ही रह गई
इक गजरा था लगाना मुझे तेरे बाल में
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