
मान जाओ न मुहब्बत से रखूँगा तुम को
वा'दा करता हूँ हिफ़ाज़त से रखूँगा तुम को
तोड़ कर चाँद सितारे तो नहीं ला सकता
इतना कह सकता हूँ इज़्ज़त से रखूँगा तुम को
— Daqiiq Jabaalii
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