मेरी तिश्नगी का ठिकाना नहीं है
मुझे ये किसी को बताना नहीं है
बुला तो लिया है उसे मैं ने लेकिन
पता है मुझे उस को आना नहीं है
तुम्हें क्या लगा था मेरा दर्द है ये
किसी फ़िल्म का कोई गाना नहीं है
तुम्हें क्यूँ बताऊॅं मेरे कौन हो तुम
मुझे कुछ भी तुम को बताना नहीं है
ग़ज़ल लिख रहा हूँ तेरे वास्ते पर
मेरी जान तुझ को सुनाना नहीं है
वो तो मर गया जिस को तू जानती थी
ये पागल है तेरा दिवाना नहीं है
परेशानी ये है मेरी ज़िंदगी की
मेरी ज़िंदगी का ठिकाना नहीं है
— DEEPAK CHATURVEDI















