मेरी आहों को पढ़कर देख लेना
छिपा ग़म दिल के अंदर देख लेना
सुकूँ की जुस्तजू होगी नहीं फिर
किसी के काम आकर देख लेना
बहुत है नाज़ जिन अपनों पे यारो
उन्हें बस आज़मा कर देख लेना
रखेंगी याद सदियाँ आपको बस
मुहब्बत रब बनाकर देख लेना
कभी आँखों में माँ की झाँक कर तुम
लिखा अपना मुक़द्दर देख लेना
तुझे ख़ुद अपनी मंज़िल ढूँढ़ना है
नहीं आएगा रहबर देख लेना
अभी आया धरम करके भलाई
अभी आएँगे पत्थर देख लेना
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