इशारा न करके सुकूँ मिल रहा है
भरोसा न करके सुकूँ मिल रहा है
ग़लत कौन उस
में न उलझा कभी भी
ख़ुलासा न करके सुकूँ मिल रहा है
न मानी तो हमने निभाई थी यारी
तमाशा न करके सुकूँ मिल रहा है
चरागों से है दोस्ती अपनी जब तब
सवेरा न करके सुकूँ मिल रहा है
तिमिर दे गया है ये खुशियाँ हमें जब
दिखावा न करके सुकूँ मिल रहा है
दिया हौसला जो ज़रा फिर उड़ी थी
बिचारा न करके सुकूँ मिल रहा है
दिखा आईना फिर चुना रास्ता था
दुलारा न करके सुकूँ मिल रहा है
बुरी सबको अपना बनाने की आदत
धरम का न करके सुकूँ मिल रहा है
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