murjha gaya maine diya tha jo gulaab | मुरझा गया मैंने दिया था जो गुलाब

  - "Dharam" Barot

मुरझा गया मैंने दिया था जो गुलाब
अच्छा लगा था प्लास्टिक का तो गुलाब

ये देख कर तुझको नहीं आया समझ
काँटा नहीं है साथ में देखो गुलाब

आसान होगी ज़िंदगी जो तुम हो मौन
चुप रह के सबको प्यार से दे दो गुलाब

जिस फूल का माली नहीं कोई यहाँ
उस फूल को भगवान का मानो गुलाब

गहरा बनेगा घाव दिल पर और भी
हर रोज़ दोगे 'इश्क़ में जिसको गुलाब

सूनी रहे है कोख जिनकी वो कपल
गर बेसहारा का बने वो जो गुलाब

इस देश में हर रंग के है शहर यार
जयपुर को तो है रंग ही प्यारो गुलाब

सच्चा नहीं कोई यहाँ अच्छा वही
जो सामने से आके दे मुझको गुलाब

  - "Dharam" Barot

Basant Shayari

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