ये कितनी बार ही मैंने बताया कुछ नहीं दिखता
हूँ मैं पागल मुझे उसके अलावा कुछ नहीं दिखता
वो नादाँ है उसे मेरे अलावा दुनिया दिखती है
करूँँ क्या ही मुझे उसके अलावा कुछ नहीं दिखता
कहा पागल कहा मजनू कहा दीवाना फिर बोला
कहो कुछ भी यही सच है कहा था कुछ नहीं दिखता
किनारे रोड के मैंने गुज़ारी ज़िंदगी सारी
मगर मैं रास्ते तेरे तुझे क्या कुछ नहीं दिखता
'धरम' जब 'इश्क़ में अच्छा लगे इक शख़्स तब कहना
कई आए मगर तेरे अलावा कुछ नहीं दिखता
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by "Dharam" Barot
our suggestion based on "Dharam" Barot
As you were reading I love you Shayari Shayari