
मुफ़लिस हो तो कोई भी इच्छा मत करो संसार में
मुफ़लिस नहीं फिर इच्छा कर कर के मरो संसार में
उम्मीद पर उम्मीद तुम से ही लगाई जाती जब
उम्मीद रख उम्मीद से ज़्यादा करो संसार में
— "Dharam" Barot
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