ग़ुरूर भी बहुत हैं और दिलकशी नहीं रही
तिरे बिना ये ज़िंदगी भी ज़िंदगी नहीं रही
मिलें हैं आज तीन-चार साल बाद हम कहीं
मगर लबों पे उस के वो शिकस्तगी नहीं रही
सभी ही तोड़ते रहे किसी तरह से दिल मिरा
मगर मिरी किसी से बे-त'अल्लुक़ी नहीं रही
ये एक शख़्स का मलाल सीख दे गया मुझे
जहाँ में अब 'दिलीप' आदमी-गरी नहीं रही
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