हमारे इश्क़ की इतनी सी क़ीमत है
जहाँ भर की, हमारे साथ ज़िल्लत है
खड़े हैं दूर तुझ से तेरी महफ़िल में
ख़ुदा की देख हम पे कितनी रहमत है
हमारी रातें भी उजड़ी हुई सी है
चराग़ों से हमें भी थोड़ी नफ़रत है
— Dileep Kumar
जहाँ भर की, हमारे साथ ज़िल्लत है
खड़े हैं दूर तुझ से तेरी महफ़िल में
ख़ुदा की देख हम पे कितनी रहमत है
हमारी रातें भी उजड़ी हुई सी है
चराग़ों से हमें भी थोड़ी नफ़रत है
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