हमारे इश्क़ की इतनी सी क़ीमत हैजहाँ भर की, हमारे साथ ज़िल्लत हैखड़े हैं दूर तुझ से तेरी महफ़िल मेंख़ुदा की देख हम पे कितनी रहमत हैहमारी रातें भी उजड़ी हुई सी हैचराग़ों से हमें भी थोड़ी नफ़रत है— Dileep Kumar