जिन्हें बे-हिसी का ज़रा भी पता नइँ
उन्हें ज़िंदगी का ज़रा भी पता नइँ
मिरी दोस्ती की हदें जानता है
मिरी दुश्मनी का ज़रा भी पता नइँ
मोहब्बत में कान्हा तो तुम बन गए हो
मगर रुक्मणी का ज़रा भी पता नइँ
— Dileep Kumar
उन्हें ज़िंदगी का ज़रा भी पता नइँ
मिरी दोस्ती की हदें जानता है
मिरी दुश्मनी का ज़रा भी पता नइँ
मोहब्बत में कान्हा तो तुम बन गए हो
मगर रुक्मणी का ज़रा भी पता नइँ
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