कौन हैं और किस को दवा देते हैं
बात सुनते ही जो मुस्कुरा देते हैं
तू है जो 'जौन' को भी नहीं जानती
और हम 'जौन' पे जाँ लुटा देते हैं
लहजे में सादगी हो किसी के तो फिर
प्यार भी लोग बे-इंतिहा देते हैं
बात फैलाते हैं लोग, जो ग़ैर हैं
और अपने उसे फिर हवा देते हैं
क्या बताएँ, परेशानी क्या हैं हमें
लोग बे-बात ही मशवरा देते हैं
— Dileep Kumar















