ज़ेहन में पिंदार ही पिंदार हैपर अकेले चलना भी दुश्वार हैऔर कोई मसअला भी अब नहींदरमियाँ बस एक ही दीवार हैचाय क्या पीते ख़बर क्या पढ़ते हमख़ून से लथपथ जो ये अख़बार हैजीत से पहले अलग हैं, बा'द मेंनेता लोगों के अलग किरदार हैहम करें शिकवा भी तो किस से करेंजब हमारे दोस्त ही दो-चार है— Dileep Kumar