"एक चेहरा"

एक चेहरा आइने से पूछता है बस यही
क्या कभी मुझ से भी प्यारा तू ने देखा है कोई

हो गया मायूस चेहरा आइना ख़ामोश था
चेहरे को फिर यूँ लगा उस का ही सारा दोष था

हँसते हँसते एक दम से रो पड़ा था दोस्तो
हाँ वही चेहरा जो कुछ कुछ कह रहा था दोस्तो

देखते हैं शख़्स काफ़ी कोसता है उस को अब
दे रहा है आइने को वो तो गाली बे-सबब

फिर अचानक एक लड़का दौड़कर आया वहाँ
आके बोला तू ही सब से अच्छा चेहरा है यहाँ

ख़ूब-सूरत कातिलाना तीर सा तलवार सा
है बड़ा ही नूर वाला चेहरा मेरे यार का

ये कहानी नज़्म बन कर आई सबके सामने
जिस ने आके बदले सबके चेहरे वाले मायने

दो तिलों वाला वो उस का चेहरा जैसे जाम हो
और फिर इतना नशीला देखते ही काम हो

तो चलो अब ख़त्म करते हैं ये चेहरे का बयाँ
फिर किसी दिन आएँगे ले कर किसी की दास्ताँ

— Yash Sharma

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