Divu
Divu
Ghazal

इक रोज़ तुझे पाने का आसार दिखेगा

इक रोज़ तसव्वुर में तिरा यार दिखेगा

हो जाए तिरा पेशा हकीमी का अगर तो
हर शख़्स यहाँ देखना बीमार दिखेगा

सब को है ख़बर दूर यहाँ दरिया नहीं है
तू कह दे तो सहरा में भी पतवार दिखेगा

पर्दा हटा कर छुप के कभी देखना बाहर
दीदार को हर शख़्स तलबगार दिखेगा

जिस शाम तिरी ज़ुल्फ़ खुली छत पे दिखेगी
हर हुस्न ही क्या चाँद भी बेज़ार दिखेगा

ता'बीर हसीं गर हो तसव्वुर सा ही फिर तो
हर ज़र्रा मिरा देखना बस प्यार दिखेगा

— Divu

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