इक रोज़ तुझे पाने का आसार दिखेगा
इक रोज़ तसव्वुर में तिरा यार दिखेगा
हो जाए तिरा पेशा हकीमी का अगर तो
हर शख़्स यहाँ देखना बीमार दिखेगा
सब को है ख़बर दूर यहाँ दरिया नहीं है
तू कह दे तो सहरा में भी पतवार दिखेगा
पर्दा हटा कर छुप के कभी देखना बाहर
दीदार को हर शख़्स तलबगार दिखेगा
जिस शाम तिरी ज़ुल्फ़ खुली छत पे दिखेगी
हर हुस्न ही क्या चाँद भी बेज़ार दिखेगा
ता'बीर हसीं गर हो तसव्वुर सा ही फिर तो
हर ज़र्रा मिरा देखना बस प्यार दिखेगा
— Divu















