Divu
Divu
Ghazal

मिली सोहबत में जो तेरे वो मैं तक़दीर चूमूँगा

रखूँगा सर तिरे आगे तिरी शमशीर चूमूँगा

ये तू ने किस तरह काबू रखा है मुझ पे आ कर देख
रखेगा क़ैद में अपने तो मैं ज़ंजीर चूमूँगा

ज़माना कहता है ज़ालिम तुझे ये सोच उन की है
मुझे पूछे जो कोई मैं तिरी तस्वीर चूमूँगा

— Divu

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