मिली सोहबत में जो तेरे वो मैं तक़दीर चूमूँगा
रखूँगा सर तिरे आगे तिरी शमशीर चूमूँगा
ये तू ने किस तरह काबू रखा है मुझ पे आ कर देख
रखेगा क़ैद में अपने तो मैं ज़ंजीर चूमूँगा
ज़माना कहता है ज़ालिम तुझे ये सोच उन की है
मुझे पूछे जो कोई मैं तिरी तस्वीर चूमूँगा
— Divu















