तू क्यूँँ कर रहा है शिकायत अभी तक
तुझे वो समझता अमानत अभी तक
तू क्यूँ मान बैठा उसे अपना दुश्मन
दिखाई कहाँ है अदावत अभी तक
इधर देख इल्ज़ाम का सिलसिला है
उधर कर रहा वो इबादत अभी तक
लिखा ख़ूब तुझ पे ग़लत कुछ न बोला
बचा कर रखी है शराफ़त अभी तक
किसी दर्द का अब असर तक नहीं है
सितम को वो कहता बशारत अभी तक
दिखा मुस्कुराता वो तेरे सितम पर
निभा वो रहा है मुहब्बत अभी तक
भुला दें तुम्हें ये नसीहत दी सब ने
कहा फिर कहाँ है क़यामत अभी तक
— Divu















