Divu
Divu
Ghazal

तू क्यूँँ कर रहा है शिकायत अभी तक

तुझे वो समझता अमानत अभी तक

तू क्यूँ मान बैठा उसे अपना दुश्मन
दिखाई कहाँ है अदावत अभी तक

इधर देख इल्ज़ाम का सिलसिला है
उधर कर रहा वो इबादत अभी तक

लिखा ख़ूब तुझ पे ग़लत कुछ न बोला
बचा कर रखी है शराफ़त अभी तक

किसी दर्द का अब असर तक नहीं है
सितम को वो कहता बशारत अभी तक

दिखा मुस्कुराता वो तेरे सितम पर
निभा वो रहा है मुहब्बत अभी तक

भुला दें तुम्हें ये नसीहत दी सब ने
कहा फिर कहाँ है क़यामत अभी तक

— Divu

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