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कहा था ये उसने है दलदल उदासी  - Firdous khan

कहा था ये उसने है दलदल उदासी
उसी से मिली फिर मुसलसल उदासी

मोहब्बत की खुशियाँ है उसके हवाले
मेरे हिस्से आई मुक़म्मल उदासी

तब्बसुम मेरे लब पे सिसकी है मेरी
मेरी उजड़ी आँखों का काजल उदासी

किया इश्क़ तो फिर कफ़ारा नहीं कुछ
मोहब्बत के मारो का है हल उदासी

Firdous khan
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Udasi Shayari

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