मैं तुम सेे इश्क़ करता हूँ मगर ज़्यादा नहीं करताकिसी भी हुस्न पर अपना समय ज़ाया' नहीं करताग़नीमत है कि मैं बाब ए क़फ़स से दूर हूँ वर्नानहीं ऐसा गुनह जो वो सितम आरा नहीं करता— Furkan Ansari