इंतिज़ार इस तरह किया हम ने

ताक़ पर रख दिया दिया हम ने

मसअला है ये ज़िंदगी भर का
तुम से इज़हार क्यूँ किया हम ने

उस की आदत थी मुस्कुराने की
जाने क्या-क्या समझ लिया हम ने

अपनी गर्दन में बाँधकर ज़ंजीर
ख़ुद ही ख़ुद को जकड़ लिया हम ने

जिस ने कुछ भी हमें नहीं समझा
उस को सब कुछ समझ लिया हम ने

— Muhammad Fuzail Khan

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