tumko visaal-e-yaar se matlab nahin hai kuchh | तुमको विसाल-ए-यार से मतलब नहीं है कुछ

  - Gaurav Singh

तुमको विसाल-ए-यार से मतलब नहीं है कुछ
वैसे मुझे भी प्यार से मतलब नहीं है कुछ

वो लोग चाहते हैं हमें साथ देखना
जिनको मेरे वक़ार से मतलब नहीं है कुछ

अब खेल में जो कुछ भी है सब जिद की बात है
अब जीत से या हार से मतलब नहीं है कुछ

मैं हूँ गरीब आदमी पैदल ही ठीक हूँ
मुझको तुम्हारी कार से मतलब नहीं है कुछ

मुझको मेरे हिसाब से जीना है अब मुझे
मालिक तेरे ग़ुबार से मतलब नहीं है कुछ

नेता अगर न आग लगाएँ तो सच कहूँ
ठाकुर खटिक चमार से मतलब नहीं है कुछ

  - Gaurav Singh

Aag Shayari

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