शायरी का शौक़ जिसको हो गया
वो समझ लो शायरी में खो गया
सब दलीलें थी मेरे ही पक्ष में
कुछ न कर पाया जो वो, तो रो गया
एक लंबी नींद लेनी थी मुझे
रेल की पटरी पे जा के सो गया
रह भी क्या सकता था फिर हम में भला
जिसको दिल से चाहते थे, वो गया
क्या हुआ जो हो गए बदनाम हम
वो तो अपने दाग़ सारे धो गया
मैं सही हो कर भी "तन्हा" रह गया
जब ख़ुदा को जागना था, सो गया
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