शा'इरी का शौक़ जिस को हो गया

वो समझ लो शा'इरी में खो गया

सब दलीलें थी मेरे ही पक्ष में
कुछ न कर पाया जो वो, तो रो गया

एक लंबी नींद लेनी थी मुझे
रेल की पटरी पे जा के सो गया

रह भी क्या सकता था फिर हम में भला
जिस को दिल से चाहते थे, वो गया

क्या हुआ जो हो गए बदनाम हम
वो तो अपने दाग़ सारे धो गया

मैं सही हो कर भी "तन्हा" रह गया
जब ख़ुदा को जागना था, सो गया

— Gopesh "Tanha"

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Khuda Shayari

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