आँख में तो रखा पर बहाएा नहीं
दर्द अपना था कोई पराया नहीं
आपसे तो मुहब्बत में ग़म ही मिला
दिल ने फिर भी तुझे जाँ भुलाया नहीं
इक दफ़ा देखा था उस को हँसते हुए
फिर कोई दूसरा हम को भाया नहीं
जब ज़रूरत हुई ख़्वाहिशें मार दी
बेचकर ख़्वाब चूल्हा जलाया नहीं
बा'द तेरे, हमें ख़ुद का चेहरा सनम
याद करने से भी याद आया नहीं
— Govind kumar















