ख़ुश हैं हम तू बताके गया
ग़म नहीं ये, रुलाक़े गया
करता था प्यारी बातें बहुत
मेरा शक़ आजमाके गया
क्यूँ किए वादे इतने बता?
वा'दा इक ना निभाके गया
ज़िस्म को कैदकर ख़ुश नहीं?
रूह तक जो दुखा के गया
आँख थी कच्चा बर्तन वही
दिल जहाँ ज़ख़्म छुपाके गया
ख़्वाब में, तेरे हम तू मेरा
ख़्वाब ये भी सताके गया
मैं ने जब भी उसे सोचा, वो
याद हिचकी में आके गया
— Govind kumar















