हमारे साथ है साया हमारा
तो भी चेहरा है क्यूँ धुँधला हमारा
इसे है हम से शिकवे फिर भी लेकिन
नहीं कर सकती कुछ दुनिया हमारा
किसी भी बात पर रोती न थी जो
लहू फिर आँख से टपका हमारा
पता जैसे चला दिल टूटने का
उतारा फिर गया पंखा हमारा
चले थे साथ जीने और मरने
अलग हो ही गया रस्ता हमारा
न जाने गुम कहाँ है नामा-बर भी
अभी तक ख़त नहीं पहुँचा हमारा
मैं उस से हँस के बातें कर रहा था
तो ग़म तकता रहा चेहरा हमारा
— Gulfam Ajmeri















