आबियारी से हमारी बाग तब उन का खिला थापतझड़ों सी ज़िन्दगी को साथ ले जब वो मिला थारौशनी देकर उसे हम तीरगी में जी रहे हैंसुब्ह मेरी ले गया वो शब के जैसे जो मिला था— Gulshan Gulzar